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बेर की फसल से एक साल में 1.60 लाख का मुनाफा…

कृषक हिमांशु ने फलोद्यान योजना का लाभ लेकर एप्पल बेर के पौधे वर्ष 2018 में लगाए थे। इन बेरो से उन्हें एक वर्ष में ही एक लाख 60 हजार रूपए का मुनाफा हुआ है।   हितग्राही हिमांशु अग्रवाल का कहना है कि उद्यानिकी फसलों से अन्य फसलों क अपेक्षा ज्यादा मुनाफा हो रहा है। विभाग […]

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केले की खेती से सुर्खियां बटोर रहा ये जिला

असीरगढ़ किला, कुण्डी भण्डारा के लिए ख्यात बुरहानपुर जिला केला उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। एक जिला एक उत्पाद योजनान्तर्गत बुरहानपुर जिला केला उत्पादक होने से केला फसल को एक जिला एक उत्पाद के लिए चयनित किया गया है। वर्तमान में जिला का कुल सिंचित रकबा 62,327 हेक्टेयर है जिसमें से उद्यानीकि फसलों […]

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जैविक खेती से मंगलू राम बना सफल किसान… औरों को भी सिखा रहे आर्गेनिक फॉर्मिंग की विधि

बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक फसल उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह के रासायनिक खाद, जहरीले कीटनाशकों को उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान के चक्र को निश्चित रूप से प्रभावित करता है। जिससे भूमि की […]

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ब्लैक राइस यानी काले चावल की खेती की ओर बढ़ रहा किसानों का रूझान…

अभी तक हम सफेद दूधिया रंग का चावल ही बोते और खाते आ रहे हैं। मगर अब काले रंग का चावल कहीं मिले तो यह अचरज की कोई बात नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य के  धमतरी जिले के किसान भी अब इसे उगाने लगे हैं। औषधीय गुणों से भरपूर ब्लैक राइस में सेलेनियम (एंटी कैंसर), एन्थ्रोसायनिन […]

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औषधि गुणों से परिपूर्ण दुर्लभ प्रजाति का पीला-पलास…

सतपुड़ा की पहाडिय़ों में न जाने कितने औषधीय पौधों व पेड़ों का अकुत भंडार है, जिसकी हम लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। समय काल के इस चक्र में कई औषधियां चाहे विलुप्त हो गई हो, लेकिन जिले की सीमा में फैली सतपुड़ा की दुर्गम पहाडिय़ों में दुर्लभ व विलुप्त होते पीले पलास का अस्तित्व […]

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संतरे की खेती से आत्मनिर्भर बने कृषक जुगल किशोर

सुसनेर विकासखण्ड के ग्राम पायली में कृषक जुगल किशोर पाटीदार ने अपनी कृषि भूमि पर 3500 संतरे के पौधे लगाए हैं। श्री पाटीदार बताते हैं कि वे वर्षों से अपनी भूमि पर परम्परागत रुप से पहले गेंहू एवं सोयाबीन की फसल बोते थे। जिससे उन्हें कुछ खास लाभ नहीं मिल रहा था। जब उन्हें पता […]

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बाँस की फसल-सोने पर सुहागा…

निमाड़ इलाके की पहचान नीम के पेड़, मिर्च और कपास की प्रचलित फसलों से होती आई हैं, पर इस क्षेत्र को बॉस के माध्यम से नई पहचान दिलाने का बीड़ा इंदौर संभाग के खरगोन जिले के ग्राम मेनगाँव के विजय पाटीदार ने न केवल उठाया है, बल्कि वे इसमें कामयाब भी रहे हैं। इन्होंने अपने […]

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मल्चिंग बेड पद्धति से टमाटर की खेती कर तिगुना फायदा ले रहे किसान…

किसानों द्वारा किये जा रहे नवाचार तथा जज्बे के फलस्वरूप यहां के सैकड़ों किसान अपनी और देश की तरक्की में निरंतर रूप से योगदान दे रहें हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला इंदौर संभाग के धार जिले में स्थित चालनी गांव में जहां से हजारों टन टमाटर दिल्ली और देश की अन्य सब्जी मंडियों […]

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छत्तीसगढ़ में विकसित फसलों की 12 नवीन किस्मों को भारत सरकार की मंजूरी…

छत्तीसगढ़ राज्य के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा विकसित विभिन्न फसलों की 12 नवीन किस्मों को व्यावसायिक खेती एवं गुणवत्ता बीज उत्पादन के लिए भारत सरकार की केन्द्रीय बीज उपसमिति ने अधिसूचित किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक फसल विज्ञान की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय बीज उपसमिति की बैठक में इंदिरा […]

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शिमला मिर्च की खेती से कौशल हुआ मालामाल

कोतमा जनपदीय अंचल के रहने वाले कृषक कौशल के लिए शिमला मिर्च की खेती लाभ का धंधा बन गई है। किन्तु उन्हें इस स्थिति में पहुंचाने में उद्यानिकी विभाग की ड्रिप सिस्टम योजना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कौशल को उद्यानिकी फसलों के विस्तार के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में एक हेक्टेयर […]