जानें प्याज की उन्नत खेती और किस्मों के बारे में…

प्याज रसोईघर की शान है। चाहे कीमत कम हो या ज्यादा, हर घर में इसकी उपलब्धता जरूर होती है। गर्मियों के समय तो इसकी डिमांड कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। क्योंकि इसकी खूबियां भी बहुत है। तो चलिए आज बात करते हैं, प्याज की खेती और उसकी किस्मों के बारे में…

मिट्टी
वैसे तो प्याज को किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन याद रखें मिट्टी में जल निकासी का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए और मिट्टी का पी.एच. मान 6.5-7.5 हो। लेकिन याद रखें प्याज को अधिक क्षारीय या दलदली मिट्टी में बिल्कुल ना उगाएं।

किस्में :-
लाल प्याज:- पूसा रेड, नासिक रेड, हिसार-2, एग्री फाउंड, बीएल 67।
सफेद प्याज :- अर्का प्रगति, पूसा सफ़ेद, पटना सफ़ेद, व्हाईट ग्रेनो।
खरीफ  किस्में :- भीमराज, भीमा रेड, भीमा सुपर, निफाद-53, एग्रीफाउंड, अर्का कल्याण, अर्का निकेतन, अर्का प्रगति, एग्री फाउंड डार्क रेड।

समय और मिट्टी की तैयारी
प्याज को जून महीने में बोया जाता है। इसके लिए मिट्टी की तैयारी खास मायने रखती है। इसके लिए आपको प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इसके उपरान्त 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या हैरो से करें। प्रत्येक जुताई के पश्चात् पाटा अवश्य लगाएं। एक में हेक्टेयर आप 10 किलो बो सकते हैं।

बीज लगाने से पहले तैयारी
प्याज के बीज लगाने से पहले आप थायरम 2 ग्राम प्रति किलो अथवा बाविस्टीन 2 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित अवश्य करें।

उर्वरक
गोबर की खाद या कम्पोस्ट, फास्फोरस तथा पोटाश भूमि के तैयारी के समय तथा नाइट्रोजन तीन भागों में बांटकर क्रमश: पौध रोपण के 15 तथा 45 दिन बाद देना चाहिए। अन्य सामान्य नियम खाद तथा उर्वरक देने के पालन किए जाने चाहिए।

कीटों से रोकथाम
प्याज की फसल में कई प्रकार के कीटों का प्रकोप देखा जाता है। जैसे आंगमारी, इसके चलते पत्ते पर भूरे धब्बे होते है, इसके चलते पत्ते सूख जाते हैं। इसके लिए 0.15 प्रतिशत डायथेन जेड-78 का छिड़काव करें। फफूंदी-इससे पत्ते पहले पीले, हरे और लम्बे हो जाते हैं तथा उन पत्तों पर गोलाकार धब्बे दिखाई पड़ते हैं। इसकी रोक थाम के लिए 0.35 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड फफूंदी नाशक दवा का छिड़काव करें। इसके अलावा गले का गलन – इसके प्रकोप होने पर शल्क गलकर गिरने लगते हैं। इसकी रोकथाम के लिए फसल को कीड़े और नमी से बचावें।

खरपतवार से बचाव
प्याज की फसलों को खरपतवार से बचाकर रखना चाहिए। अन्यथा ये मिट्टी के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं और फसल में बढ़ोतरी नहीं हो पाती। इसलिए खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहें।

सिंचाई
खरीफ मौसम की फसल में रोपण के तुरन्त बाद सिंचाई करें। आवश्यकतानुसार 8-10 दिन के अंतराल से हल्की सिंचाई करें।

कंद की खुदाई :-
खरीफ प्याज की फसल लगभग 5 माह में नवम्बर-दिसम्बर माह में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है।