कांट्रेक्ट फॉर्मिंग से खेती बनी लाभ का व्यवसाय

छिंदवाडा जिले के परासिया विकासखंड के ग्राम बीजकवाड़ा के कृषक गुरूप्रसाद पिता रावजी पवार कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अधिकारियों की सलाह और मार्गदर्शन में उन्नत तकनीक अपनाकर आलू की कांट्रेक्ट फार्मिंग के साथ ही स्वीट कॉर्न और अन्य फसलों का उत्पादन कर कई गुना लाभ कमा रहें हैं। कांट्रेक्ट फार्मिंग से पूर्व उन्हें निश्चित आमदनी प्राप्त नहीं होती थी। साथ ही बाजार भाव में उतार चढ़ाव के कारण कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता था। लेकिन जब से कृषक रावजी ने कांट्रेक्ट फार्मिंग अपनाई है, तब से कंपनी द्वारा उपज सीधे खेत से उठाई जा रही है, जिससे मंडी तक ढुलाई एवं हम्माली की बचत भी हो रही है। कंपनी द्वारा उपज का तीन से 10 दिन के अंदर भुगतान भी कर दिया जाता है। इस वर्ष कृषक श्री गुरूप्रसाद द्वारा 50 एकड़ में पेप्सीको कंपनी के साथ आलू की खेती की गई, जिससे उन्हें प्रति एकड एक लाख रूपये के मान से कुल 50 लाख रूपये की आमदनी प्राप्त हुई है, जिससे कृषक श्री गुरूप्रसाद अत्यन्त प्रसन्न हैं। कृषक श्री गुरूप्रसाद ने बताया कि कृषि के सभी नवीन व उन्नत उपकरणों की मदद और कांट्रेक्ट फार्मिंग के माध्यम से मुझे अपने क्षेत्र के अन्य कृषकों की अपेक्षा अधिक आमदनी प्राप्त हो रही है। अब मैं मेरे संपर्क में आये कृषकों को भी नई तकनीकों और कांट्रेक्ट फार्मिंग की जानकारी से अवगत करा रहा हूं, साथ ही विभागीय अधिकारियों से सतत् संपर्क में रहने और कांट्रेक्ट फार्मिंग अपनाने की सलाह देता हूं।

कृषक गुरूप्रसाद पवार ने बताया कि पहले मैं शिक्षक था, लेकिन खेती करने में रूचि रखता था। मेरे पास कुल 6 एकड़ जमीन है। मुझे कृषि अधिकारियों के सतत् मार्गदर्शन से उन्नत कृषि करने की जानकारी प्राप्त हुई, जिससे खेती की ओर मेरा रूझान और बढ़ गया है जिससे आज मैं उन्नत कृषि कर प्रदेश के उन्नत कृषकों में शामिल हो गया हूं। उन्होंने बताया कि सन् 2012-13 में कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन पर मैं पेप्सीको कंपनी के अधिकारियों से मिला और  5 एकड जमीन पर आलू की कांट्रेक्ट फॉर्मिंग कृषि अधिकारियों की सलाह पर प्रारंभ की। कृषि अधिकारियों द्वारा तकनीकी सलाह दी गई और सतत खेत का निरीक्षण किया गया। पेप्सिको कंपनी द्वारा मुझे आलू का बीज भी उपलब्ध कराया जाता है और उपज का मूल्य पहले से तय हो जाता है। कांट्रेक्ट फॉर्मिंग द्वारा मुझे जोखिम रहित आमदनी प्राप्त होती है और बाजार भाव के उतार-चढ़ाव का उपज के मूल्य पर कोई असर नहीं पड़ता है। पहली बार अनुबंध खेती करने से मुझे बहुत लाभ प्राप्त हुआ जिससे प्रोत्साहित होकर आज मैं 50 एकड जमीन में आलू की अनुबंध खेती कर रहा हूं। इसी तरह 2016 में आत्मा परियोजना के अधिकारियों के संपर्क में आने पर मुझे स्वीट कॉर्न की तकनीक और उत्पादन की जानकारी प्राप्त हुई और विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया स्वीट कॉर्न का बीज लगभग 5 एकड जमीन पर लगाया व लाभ प्राप्त किया और तब से ही मेरे द्वारा स्वीट कॉर्न की खेती भी की जा रही है। वर्तमान में मैं अपनी व ठेके पर ली गई लगभग 50 एकड़ जमीन पर स्वीट कॉर्न की खेती कर रहा हूं और उपज का अच्छा मूल्य प्राप्त कर रहा हूं।

उन्होंने बताया कि मुझे वर्ष 2017-18 में आत्मा परियोजना के अंतर्गत गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि के उपयोग से गेहूं की फसल का अधिक उत्पादन करने पर राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। मेरे द्वारा वर्तमान में कांट्रेक्ट फॉर्मिंग की जा रही है, जिससे पहले की जा रही खेती की तुलना में लगभग 200 प्रतिशत अधिक आय प्राप्त हो रही है। मैं कृषि की सभी नवीन तकनीकों और उन्नत उपकरणों का प्रयोग खेती में करता हूं, जिससे मुझे श्रम, धन और पानी तीनों की बचत होती है। मेरे द्वारा संपूर्ण आलू की खेती ड्रिप पध्दति से की जाती है जिससे कम पानी में अधिक उपज प्राप्त हो रही है और आलू फसल उत्पादन के बाद मेरे द्वारा गोभी, लहसुन, तरबूज और खरबूज की खेती भी की जा रही है। कृषक श्री गुरूप्रसाद जिले के अन्य कृषकों को भी कृषि की उन्नत तकनीकों को अपनाने और कांट्रेक्ट फॉर्मिंग कर कृषि से कई गुना आमदनी प्राप्त करने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारियों को मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।