ऐसे करें अजवाइन की खेती… मिलेगी तगड़ी कीमत

अजवाइन के बारे में तो सभी जानते ही हैं। ये भारतीय घरों में मसाले के तौर पर काम आता है। साथ ही इसके औषधीय गुणों के कारण कई प्रकार की दवाईयों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके दाने खनिज तत्वों से भरपूर होते हैं। वैसे अजवाइन का पौधा झाड़ी के आकार का होता है, यानी एक छोटा सा पौधा होता है। इसे धनिया प्रजाति की पौधा भी माना जाता है। भारत में इसके मुख्य उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और राजस्थान हैं। तो चलिए आज हम बात करते हैं अजवाइन की खेती के बारे में…

जलवायु
अजवाइन की खेती रबी मौसम में ली जाती है। इसे ज्यादा बारिश की जरूरत नहीं होती है। ठंड के मौसम में इसकी फसल अच्छी होती है। पाले से इसके पौधों को नुकसान नहीं होता है। इसके पौधे इतने मजबूत होते हैं, कि ये पाला भी सहन कर लेते हैं। यह एक उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है। अजवाइन के पौधों को अंकुरित होने के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। सर्दियों के मौसम में यह न्यूनतम 10 डिग्री के आस-पास तापमान पर भी अच्छे से विकास कर लेते हैं।

मिट्टी                                                    
अजवाइन की खेती के लिए अच्छी पानी निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। जिसका पी.एच. मान 6.5-8 के मध्य होना चाहिए। लेकिन ज्यादा नमी और पानी इसके लिए हानिकारक होते हैं। अत: इस बात का खास ध्यान रखे।

उन्नत किस्में
अजवाइन की वैसे तो कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन मिट्टी और उत्पादन की दृष्टि से मुख्यत: लाभ सलेक्शन-1, लाभ सलेक्शन 2, एए-1, एए-2, आरए 1-80, गुजरात अजवाइन-1 और आर ए 19-80 हैं, जो कम से कम 130 से 145 दिनों में उत्पादन करने लगते हैं और किसानों को अच्छी आमदनी देते हैं।

खेत की तैयारी
अजवाइन खेती के लिए खेतों की गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद खेतों को कुछ दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद गोबर खाद मिलाकर कल्टीवेटर से तीन बार तिरछी जुताई करे। फिर पानी डालें। फिर पांच दिन बाद फिर जुताई करें। वैसे देखा जाता है कि अजवाइन की खेती के लिए रोपाई और बीज रोपण दोनों ही कारगर हैं, फिर किसान पौध रोपण के जरिए इसकी खेती  ज्यादा करते हैं।

नर्सरी में ऐसे करें पौधे तैयार
फिर भी यदि आप पौध रोपण कर इसकी खेती करना चाहते हैं तो नर्सरी में आपको क्यारियां बनाकर एक निश्चित अंतराल के बाद पंक्तियों में इन्हें लगा दें।

बीजों का छिड़काव
अजवाइन की खेती की दूसरी पद्धति छिड़काव वाली है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर आपको साढ़े तीन किलों से चार किलो बीज की जरूरत होगी। लेकिन बीजों को उपचारित कर ही प्रयोग में लाना चाहिए।

सिंचाई
जैसा कि अजवाइन की रोपाई सुखी या थोड़ी नम भूमि में की जाती है, अत: रोपाई के बाद तुरंत ही सिंचाई करें तो ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन सिंचाई धीरे-धीरे ही करें क्योंकि पानी की बौछार यदि ज्यादा होगी तो बीजों के बह जाएंगे।

खरपतवार से सुरक्षा
हर फसल की भांति इसमें भी खरपतवार की संभावना बनी रहती है। खरपतवार हर फसल के साथ उग आते हैं और मिट्टी से भरपूर पोषक तत्वों का उपयोग कर पौधों के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए समय-समय पर खरपतवार की निंदाई-गुड़ाई करते रहना चाहिए।

उर्वरक
अजवाइन की खेती के समय खेत की तैयारी के दौराना अच्छी मात्रा में गोबर की खाद डालना चाहिए। इसके अलावा रासायनिक खाद के रूप में 80 किलो एनपीके की मात्रा को खेत की आखिरी जुताई के वक्त भी डाल सकते हैं।

रोगों से सुरक्षा
अजवाइन की फसल में मौसम परिवर्तन के चलते माहू रोग का खासा प्रभाव देखा जाता है। इसलिए इसकी लिए आप डाइमिथोएट, मैलाथियान या मोनोक्रोटोफास का छिड़काव करें। इसके अलावा अजवाइन को झुलसा रोग से बचाने मैंकोजेब का प्रयोग करें।

कटाई
अजवाइन की फसल 4 से 5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन ध्यान से देखें जब इसके गुच्छे पक कर भूरे हो जाएं तभी कटाई करें।

बाजार मूल्य
अजवाइन की औसत पैदावार एक हेक्टेयर में 9 से 10 क्विंटल के आसपास हो जाती है। और ये बाजार में काफी अच्छे दामों यानी 12 हजार से 18 हजार प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती है। इसलिए आप इसमें तगड़ी कमाई कर सकते हैं।

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